निर्घातोग्नैः कुञ्जलीनाञ्जिघांसु-
र्ज्यानिर्घोषैः क्षोभयामास सिंहान् ।
नूनं तेपामभ्यसृयापरोऽभू-
द्वीर्योदग्रे राजशब्दो मृगेषु ॥
निर्घातोग्नैः कुञ्जलीनाञ्जिघांसु-
र्ज्यानिर्घोषैः क्षोभयामास सिंहान् ।
नूनं तेपामभ्यसृयापरोऽभू-
द्वीर्योदग्रे राजशब्दो मृगेषु ॥
र्ज्यानिर्घोषैः क्षोभयामास सिंहान् ।
नूनं तेपामभ्यसृयापरोऽभू-
द्वीर्योदग्रे राजशब्दो मृगेषु ॥
अन्वयः
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जिघांसुः (सः) निर्घात-उग्रैः ज्या-निर्घोषैः कुञ्ज-लीनान् सिंहान् क्षोभयामास। नूनम् वीर्य-उदग्रे तेषाम् मृगेषु राजशब्दः अभ्यसूयापरः अभूत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निर्घातेति॥ कुञ्जेषु लीनान्।
निकुञ्जकुञ्जौ वा क्लीवे लतादिपिहितोदरे इत्यमरः (अमरकोशः २.३.९ ) । सिंहाञ्जिघांसुर्हन्तुमिच्छुः। निर्घातो व्योमोत्थित औत्पातिकः शब्द विशेषः। तद्वदुग्रै रौद्रैर्ज्यानिर्घोषैर्मौर्वीशब्दैः क्षोभयामास। अत्रोत्प्रेक्षते-तेषां सिंहानां संबन्धिनि वीर्येणोदग्र उन्नते मृगेषु विषये यो राजशब्दस्तस्मिन्नभ्यसूयापरोऽभून्नृनम्। अन्यथा कथमेतानन्विष्य हन्यादित्यर्थः। मृगाणाम् इति पाठे समासे गुणभूतत्वात् राजशब्देन संबन्धो दुर्घटः। शालिनीवृत्तम्-शालिन्युक्ता स्तौ तगौ गोऽब्धिलोकैः इति लक्षणात् ॥
Summary
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Desiring to hunt them, the king drove the lions hiding in the thickets out with the twang of his bowstring, which was as terrible as a thunderclap. Indeed, he was intolerant of the title 'king' (of beasts) being applied to them, as he himself was pre-eminent in valor.
सारांश
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राजा ने धनुष की टंकार से गुफाओं में छिपे सिंहों को व्याकुल कर दिया। उन्हें 'वनराज' कहलाने वाले उन सिंहों के प्रति ईर्ष्या का भाव था, जो पराक्रम में उनके समान थे।
पदच्छेदः
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| निर्घातोग्रैः | निर्घात–उग्र (३.३) | with (sounds) terrible as thunderclaps |
| कुञ्जलीनान् | कुञ्ज–लीन (२.३) | hiding in the bowers |
| जिघांसुः | जिघांसु (१.१) | desirous of killing |
| ज्यानिर्घोषैः | ज्या–निर्घोष (३.३) | with the twanging of the bowstring |
| क्षोभयामास | क्षोभयामास (√क्षुभ् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | agitated |
| सिंहान् | सिंह (२.३) | the lions |
| नूनम् | नूनम् | Indeed |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| अभ्यसूयापरः | अभ्यसूया–पर (१.१) | intolerant |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| वीर्योदग्रे | वीर्य–उदग्र (७.१) | pre-eminent in valor |
| राजशब्दः | राज–शब्द (१.१) | the title 'king' |
| मृगेषु | मृग (७.३) | among animals |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्घा | तो | ग्नैः | कु | ञ्ज | ली | ना | ञ्जि | घां | सु |
| र्ज्या | नि | र्घो | षैः | क्षो | भ | या | मा | स | सिं | हान् |
| नू | नं | ते | पा | म | भ्य | सृ | या | प | रो | ऽभू |
| द्वी | र्यो | द | ग्रे | रा | ज | श | ब्दो | मृ | गे | षु |
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