कुम्भपूरणभवः पटुरुञ्चै-
रुञ्चचार निनदोऽम्भसि तस्याः ।
तत्र स द्विरदबृंहितशङ्की
शब्दपातिनमिषुं विससर्ज ॥
कुम्भपूरणभवः पटुरुञ्चै-
रुञ्चचार निनदोऽम्भसि तस्याः ।
तत्र स द्विरदबृंहितशङ्की
शब्दपातिनमिषुं विससर्ज ॥
रुञ्चचार निनदोऽम्भसि तस्याः ।
तत्र स द्विरदबृंहितशङ्की
शब्दपातिनमिषुं विससर्ज ॥
अन्वयः
AI
तस्याः अम्भसि कुम्भ-पूरण-भवः पटुः निनदः उच्चैः उच्चचार। तत्र सः द्विरद-बृंहित-शङ्की (सन्) शब्द-पातिनम् इषुं विससर्ज।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कुम्भेति॥ तस्यास्तमसाया अम्भसि कुम्भपूरणेन भव उत्पन्नः। पचाद्यच्। पटुर्मधुरः। उञ्चैर्गम्भूरो निनदो ध्वनिरुञ्चचारोदियाय। तत्र निनदे स नृपः। द्विरदबृंहितं शङ्कत इति द्विरदबृंहितशङ्की सन्, शब्देन शब्दानुसारेण तपतीति शब्दपातिनमिषुं विससर्ज। स्वागतावृत्तम् ॥
Summary
AI
A loud gurgling sound, produced by the filling of a pot, arose from the river's water. Suspecting it to be the trumpeting of an elephant, he released an arrow that targets its object by sound alone.
सारांश
AI
नदी में घड़ा भरने से उत्पन्न गंभीर ध्वनि को हाथी की चिंघाड़ समझकर राजा ने उस दिशा में शब्दभेदी बाण छोड़ दिया, जो शास्त्रानुसार वर्जित था।
पदच्छेदः
AI
| कुम्भपूरणभवः | कुम्भ–पूरण–भव (१.१) | arising from the filling of a pot |
| पटुः | पटु (१.१) | loud |
| उच्चैः | उच्चैस् | loudly |
| उच्चचार | उच्चचार (उत्√चर् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arose |
| निनदः | निनद (१.१) | a sound |
| अम्भसि | अम्भस् (७.१) | in the water |
| तस्याः | तत् (६.१) | of it (the river) |
| तत्र | तत्र | there |
| सः | तत् (१.१) | he |
| द्विरदबृंहितशङ्की | द्विरद–बृंहित–शङ्किन् (१.१) | suspecting the trumpeting of an elephant |
| शब्दपातिनम् | शब्द–पातिन् (२.१) | which falls on the sound |
| इषुम् | इषु (२.१) | an arrow |
| विससर्ज | विससर्ज (वि√सृज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he released |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | म्भ | पू | र | ण | भ | वः | प | टु | रु | ञ्चै |
| रु | ञ्च | चा | र | नि | न | दो | ऽम्भ | सि | त | स्याः |
| त | त्र | स | द्वि | र | द | बृं | हि | त | श | ङ्की |
| श | ब्द | पा | ति | न | मि | षुं | वि | स | स | र्ज |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.