अन्वयः
तस्मिन् वने in that forest, निवसता by Rama who was living, जनस्थाननिवासिनाम् of the inhabitants of Janasthana, रक्षसाम् of rakshasas, चतुर्दशसहस्राणि fourteen thousand of them, निहतानि आसन् were killed.
Summary
During his stay in that forest Rama killed fourteen thousand rakshasas who were inhabitants of Janasthana.
पदच्छेदः
| निजघान | निजघान (√नि-हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रणे | रण (७.१) |
| रामस् | राम (१.१) |
| तेषां | तद् (६.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| पदानुगान् | पदानुग (२.३) |
| रक्षसां | रक्षस् (६.३) |
| निहतान्य् | निहत (√नि-हन् + क्त, १.३) |
| आसन् | आसन् (√अस् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| सहस्राणि | सहस्र (१.३) |
| चतुर्दश | चतुर्दशन् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नि | ज | घा | न | र | णे | रा | म |
| स्ते | षां | चै | व | प | दा | नु | गान् |
| र | क्ष | सां | नि | ह | ता | न्या | स |
| न्स | ह | स्रा | णि | च | तु | र्द | श |