अन्वयः
रोमपादेन by Romapada, सख्यम् friendship, सम्बन्धकं चैव relationship, धीमते to the intellectual, ऋषिपुत्राय son of the sage, आख्यातम् narrated, तदा then, तम् him (Romapada), प्रत्यपूजयत् in return felicitatetd.
Summary
Romapada explained his friendship and relationship with him (Dasaratha). Rsyasringa of great intellect in return felicitated Dasaratha.
पदच्छेदः
| रोमपादेन | रोमपाद (३.१) |
| चाख्यातम् | च (अव्ययः)–आख्यात (√आ-ख्या + क्त, १.१) |
| ऋषिपुत्राय | ऋषि–पुत्र (४.१) |
| धीमते | धीमत् (४.१) |
| सख्यं | सख्य (१.१) |
| सम्बन्धकं | सम्बन्धक (१.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| प्रत्यपूजयत् | प्रत्यपूजयत् (√प्रति-पूजय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| लो | म | पा | दे | न | चा | ख्या | त |
| मृ | षि | पु | त्रा | य | धी | म | ते |
| स | ख्यं | सं | ब | न्ध | कं | चै | व |
| त | दा | तं | प्र | त्य | पू | ज | यत् |