अन्वयः
धर्मात्मन् O Follower of righteousness, अनपत्य: अस्मि I am without children, शान्ताभर्ता husband of Shanta, त्वया by you, आज्ञप्त: ordered, मम my, कुलस्य of race, सन्तानार्थम् for the sake of children (for perpetuation of my race), क्रतुम् sacrifice, आहरेत he may perform.
Summary
O righteous king I am issueless. Let Rsyasringa, husband of Santa be ordered to perform the a sacrificial ceremony so that I shall be blessed with I son for the perpetuaion of my race.
पदच्छेदः
| अनपत्यो | अनपत्य (१.१) |
| ऽस्मि | अस्मि (√अस् लट् उ.पु. ) |
| धर्मात्मञ् | धर्म–आत्मन् (८.१) |
| शान्ता | शान्ता (१.१) |
| भार्या | भार्या (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| क्रतुम् | क्रतु (२.१) |
| आहरेत | आहरेत (√आ-हृ विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| त्वयाज्ञप्तः | त्वद् (३.१)–आज्ञप्त (√आ-ज्ञपय् + क्त, १.१) |
| संतानार्थं | संतान–अर्थ (२.१) |
| कुलस्य | कुल (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | न | प | त्यो | ऽस्मि | ध | र्मा | त्म |
| ञ्शा | न्ता | भ | र्ता | म | म | क्र | तुम् |
| आ | ह | रे | त | त्व | या | ज्ञ | प्तः |
| सं | ता | ना | र्थं | कु | ल | स्य | च |