पदच्छेदः
| भक्ष्यान्नपानैर् | भक्ष्य–अन्न–पान (३.३) |
| बहुभिः | बहु (३.३) |
| समुपेताः | समुपेत (√समुप-इ + क्त, १.३) |
| सुनिष्ठिताः | सु (अव्ययः)–निष्ठित (√नि-स्था + क्त, १.३) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| पौरजनस्यापि | पौर–जन (६.१)–अपि (अव्ययः) |
| कर्तव्या | कर्तव्य (√कृ + कृत्, १.३) |
| बहुविस्तराः | बहु–विस्तर (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | क्ष्या | न्न | पा | नै | र्ब | हु | भिः |
| स | मु | पे | ताः | सु | नि | ष्ठि | ताः |
| त | था | पौ | र | ज | न | स्या | पि |
| क | र्त | व्या | ब | हु | वि | स्त | राः |