पदच्छेदः
| यथोक्तं | यथा (अव्ययः)–उक्त (√वच् + क्त, २.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| करिष्यामो | करिष्यामः (√कृ लृट् उ.पु. द्वि.) |
| न | न (अव्ययः) |
| किंचित् | कश्चित् (१.१) |
| परिहास्यते | परिहास्यते (√परि-हा लृट् प्र.पु. एक.) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सुमन्त्रम् | सुमन्त्र (२.१) |
| आहूय | आहूय (√आ-ह्वा + ल्यप्) |
| वसिष्ठो | वसिष्ठ (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | थो | क्तं | त | त्क | रि | ष्या | मो |
| न | किं | चि | त्प | रि | हा | स्य | ते |
| त | तः | सु | म | न्त्र | मा | हू | य |
| व | सि | ष्ठो | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |