वसिष्ठवाक्यं तच्छ्रुत्वा सुमन्त्रस्त्वरितस्तदा ।
व्यादिशत्पुरुषांस्तत्र राज्ञामानयने शुभान् ॥
वसिष्ठवाक्यं तच्छ्रुत्वा सुमन्त्रस्त्वरितस्तदा ।
व्यादिशत्पुरुषांस्तत्र राज्ञामानयने शुभान् ॥
अन्वयः
तत् that, वसिष्ठवाक्यम् words of Vasishta, श्रुत्वा having heard, सुमन्त्र: Sumantra, तदा then, त्वरित: speedily, तत्र there, राज्ञाम् kings, आनयने in bringing, शुभान् virtuous, पुरुषान् emissaries, व्यादिशत् ordered.M N Dutt
Having heard those words of Vasistha, Sumantra speedily ordered the emissaries to bring the kings.Summary
Having heard the words of Vasishta, Sumantra speedily despatched virtuous and auspicious emissaries to bring the kings.पदच्छेदः
| वसिष्ठवाक्यं | वसिष्ठ–वाक्य (२.१) |
| तच् | तद् (२.१) |
| छ्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| सुमन्त्रस् | सुमन्त्र (१.१) |
| त्वरितस् | त्वरित (√त्वर् + क्त, १.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| व्यादिशत् | व्यादिशत् (√व्या-दिश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुरुषांस् | पुरुष (२.३) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) |
| आनयने | आनयन (७.१) |
| शुभान् | शुभ (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | सि | ष्ठ | वा | क्यं | त | च्छ्रु | त्वा |
| सु | म | न्त्र | स्त्व | रि | त | स्त | दा |
| व्या | दि | श | त्पु | रु | षां | स्त | त्र |
| रा | ज्ञा | मा | न | य | ने | शु | भान् |