हयस्य यानि चाङ्गानि तानि सर्वाणि ब्राह्मणाः ।
अग्नौ प्रास्यन्ति विधिवत्समस्ताः षोडशर्त्विजः ॥
हयस्य यानि चाङ्गानि तानि सर्वाणि ब्राह्मणाः ।
अग्नौ प्रास्यन्ति विधिवत्समस्ताः षोडशर्त्विजः ॥
अन्वयः
हयस्य horse's, यानि अङ्गानि those limbs, तानि सर्वाणि all of them, समन्त्रा: with prayers, षोडश ऋत्विज: sixteen officiating priests, ब्राह्मणा: brahmins, विधिवत् as per the customs, अग्नौ in the fire, प्रास्यन्ति offered.M N Dutt
Then sixteen sacrificial priests in the prescribed form offered the various parts of the horse to the fire.Summary
The sixteen officiating priests (brahmins) offered all the horse's limbs with prayers as per the customs.पदच्छेदः
| हयस्य | हय (६.१) |
| यानि | यद् (१.३) |
| चाङ्गानि | च (अव्ययः)–अङ्ग (१.३) |
| तानि | तद् (२.३) |
| सर्वाणि | सर्व (२.३) |
| ब्राह्मणाः | ब्राह्मण (१.३) |
| अग्नौ | अग्नि (७.१) |
| प्रास्यन्ति | प्रास्यन्ति (√प्र-अस् लट् प्र.पु. बहु.) |
| विधिवत् | विधिवत् (अव्ययः) |
| समस्ताः | समस्त (१.३) |
| षोडशर्त्विजः | षोडशन्–ऋत्विज् (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | य | स्य | या | नि | चा | ङ्गा | नि |
| ता | नि | स | र्वा | णि | ब्रा | ह्म | णाः |
| अ | ग्नौ | प्रा | स्य | न्ति | वि | धि | व |
| त्स | म | स्ताः | षो | ड | श | र्त्वि | जः |