M N Dutt
And bending low before him, the deities spoke to him saying, O Vişnu, for the benefit of the worlds, we shall appoint you to some work.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अब्रुवन् | अब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
| सुराः | सुर (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| समभिष्टूय | समभिष्टूय (√समभि-स्तु + ल्यप्) |
| संनताः | संनत (√सम्-नम् + क्त, १.३) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| नियोक्ष्यामहे | नियोक्ष्यामहे (√नि-युज् लृट् उ.पु. द्वि.) |
| विष्णो | विष्णु (८.१) |
| लोकानां | लोक (६.३) |
| हितकाम्यया | हित–काम्या (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | म | ब्रु | व | न्सु | राः | स | र्वे |
| स | म | भि | ष्टू | य | सं | न | ताः |
| त्वां | नि | यो | क्ष्या | म | हे | वि | ष्णो |
| लो | का | नां | हि | त | का | म्य | या |