अन्वयः
भगवन् "O Venerable lord, पुरा earlier, प्रीतेन by the well pleased, त्वया by you, तस्मै for him, वर: boon, दत्त: granted, तम् that, मानयन्त: honouring, तस्य for his, सर्वम् entirely, नित्यम् always, क्षमामहे we endure.
M N Dutt
O lord, as you have well-pleased conferred on him a boon, we always suffer him in deference to it.
Summary
Pleased with his penance, Lord, you had granted him a boon. By honour that boon and daily endure all his cruelty.
पदच्छेदः
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| तस्मै | तद् (४.१) |
| वरो | वर (१.१) |
| दत्तः | दत्त (√दा + क्त, १.१) |
| प्रीतेन | प्रीत (√प्री + क्त, ३.१) |
| भगवन् | भगवत् (८.१) |
| पुरा | पुरा (अव्ययः) |
| मानयन्तश् | मानयत् (√मानय् + शतृ, १.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| क्षमामहे | क्षमामहे (√क्षम् लट् उ.पु. द्वि.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त्व | या | त | स्मै | व | रो | द | त्तः |
| प्री | ते | न | भ | ग | व | न्पु | रा |
| मा | न | य | न्त | श्च | तं | नि | त्यं |
| स | र्वं | त | स्य | क्ष | मा | म | हे |