अन्वयः
पार्थिव O King, क्रोधम् wrath, उत्स्रष्टुम् to vent out, मे बुद्धि: न भवति my mind does not permit, सा चर्या that sacrificial perfomnce of sacrifice, तथा भूता हि is such that, तत्र at that time, शाप: curse, न मुच्यते will not be released.
Summary
O King my mind does not permit me to vent my wrath. The nature of sacrifice is such that I refrain from cursing them.
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| क्रोधम् | क्रोध (२.१) |
| उत्स्रष्टुं | उत्स्रष्टुम् (√उत्-सृज् + तुमुन्) |
| बुद्धिर् | बुद्धि (१.१) |
| भवति | भवति (√भू लट् प्र.पु. एक.) |
| पार्थिव | पार्थिव (८.१) |
| तथाभूता | तथाभूत (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| चर्या | चर्या (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| शापस् | शाप (१.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| मुच्यते | मुच्यते (√मुच् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | च | मे | क्रो | ध | मु | त्स्र | ष्टुं |
| बु | द्धि | र्भ | व | ति | पा | र्थि | व |
| त | था | भू | ता | हि | सा | च | र्या |
| न | शा | प | स्त | त्र | मु | च्य | ते |