अन्वयः
शोकपरायण: engrossed in grief, अन्तर्गतमना: भूत्वा having been introspective, मुहु: again and again, क्रौञ्चीम् एव about female krauncha bird, शोचन् lamenting, पुन: again, इमम् श्लोकम् this sloka, जगौ recited.
Summary
Griefstricken, Valmiki having become introspective and lamenting the plight of the female krauncha again and again, recited this sloka.
पदच्छेदः
| शोचन्न् | शोचत् (√शुच् + शतृ, १.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| मुहुः | मुहुर् (अव्ययः) |
| क्रौञ्चीम् | क्रौञ्ची (२.१) |
| उपश्लोकम् | उपश्लोक (२.१) |
| इमं | इदम् (२.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| जगाव् | जगौ (√गा लिट् प्र.पु. एक.) |
| अन्तर्गतमना | अन्तर्गतमनस् (१.१) |
| भूत्वा | भूत्वा (√भू + क्त्वा) |
| शोकपरायणः | शोक–परायण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| शो | च | न्ने | व | मु | हुः | क्रौ | ञ्ची |
| मु | प | श्लो | क | मि | मं | पु | नः |
| ज | गा | व | न्त | र्ग | त | म | ना |
| भू | त्वा | शो | क | प | रा | य | णः |