ततो रामो जलं स्पृष्ट्वा प्रहृष्टवदनः शुचिः ।
प्रतिजग्राह ते विद्ये महर्षेर्भावितात्मनः ।
विद्यासमुदितो रामः शुशुभे भूरिविक्रमः ॥
ततो रामो जलं स्पृष्ट्वा प्रहृष्टवदनः शुचिः ।
प्रतिजग्राह ते विद्ये महर्षेर्भावितात्मनः ।
विद्यासमुदितो रामः शुशुभे भूरिविक्रमः ॥
अन्वयः
तत: thereafter, राम: Rama, जलम् water, स्पृष्ट्वा having touched, शुचि: got purified, प्रहृष्टवदन: with happy coutenance, भावितात्मन: one who has perceived the supreme soul, महर्षे: from maharshi, ते विद्ये those two sciences, प्रतिजग्राह received.M N Dutt
Thereat Rāma with a cheerful countenance sipning water with a purified body received those sciences from the Maharși of subdued soul.Summary
Thereafter Rama, touched the water and was sanctified. With a cheerful face he received those two sciences from the maharshi who had perceived the supreme soul.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| रामो | राम (१.१) |
| जलं | जल (२.१) |
| स्पृष्ट्वा | स्पृष्ट्वा (√स्पृश् + क्त्वा) |
| प्रहृष्टवदनः | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त)–वदन (१.१) |
| शुचिः | शुचि (१.१) |
| प्रतिजग्राह | प्रतिजग्राह (√प्रति-ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ते | तद् (२.२) |
| विद्ये | विद्या (२.२) |
| महर्षेर् | महत्–ऋषि (५.१) |
| भावितात्मनः | भावितात्मन् (५.१) |
| विद्यासमुदितो | विद्या–समुदित (√सम्-वद् + क्त, १.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| शुशुभे | शुशुभे (√शुभ् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भूरिविक्रमः | भूरि–विक्रम (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | रा | मो | ज | लं | स्पृ | ष्ट्वा | प्र | हृ | ष्ट | व |
| द | नः | शु | चिः | प्र | ति | ज | ग्रा | ह | ते | वि | द्ये |
| म | ह | र्षे | र्भा | वि | ता | त्म | नः | वि | द्या | स | मु |
| दि | तो | रा | मः | शु | शु | भे | भू | रि | वि | क्र | मः |