अन्वयः
सत्कारम् hospitality, समनुप्राप्य having received, कथाभि: with their conversation, अभिरञ्जयन् delighted, ते ऋषय: those rishis, समाहिता: with composed minds, यथार्हम् in accordance with tradition, सन्ध्याम् evening prayers, अजपन् recited.
Summary
Having received due hospitality, they delighted them (ascetics) with their talk. The rishis with composed minds recited their evening prayer as usual.
पदच्छेदः
| सत्कारं | सत्कार (२.१) |
| समनुप्राप्य | समनुप्राप्य (√समनुप्र-आप् + ल्यप्) |
| कथाभिर् | कथा (३.३) |
| अभिरञ्जयन् | अभिरञ्जयत् (√अभि-रञ्जय् + शतृ, १.१) |
| न्यवसन् | न्यवसन् (√नि-वस् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| सुसुखं | सु (अव्ययः)–सुखम् (अव्ययः) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| कामाश्रमपदे | काम–आश्रम–पद (७.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | त्का | रं | स | म | नु | प्रा | प्य |
| क | था | भि | र | भि | र | ञ्ज | यन् |
| न्य | व | स | न्सु | सु | खं | त | त्र |
| का | मा | श्र | म | प | दे | त | दा |