अन्वयः
ब्रह्मन् O Brahmarshi, प्रजापते: Prajapati's, भृशाश्वस्य Brishaswas', पुत्रान् sons, सत्यपराक्रमान् men of truthful prowess, तपोबलभृत़ः men endowed with ascetic energy, राघवाय for Rama, निवेदय offer.
Summary
"O Brahmarshi, you may offer to Rama, the sons of Prajapati Brishasva who are the weapons bestowed with the power that comes from truth and ascetic energy".
पदच्छेदः
| प्रजापतेर् | प्रजापति (६.१) |
| भृशाश्वस्य | भृशाश्व (६.१) |
| पुत्रान् | पुत्र (२.३) |
| सत्यपराक्रमान् | सत्य–पराक्रम (२.३) |
| तपोबलभृतान् | तपस्–बल–भृत (√भृ + क्त, २.३) |
| ब्रह्मन् | ब्रह्मन् (८.१) |
| राघवाय | राघव (४.१) |
| निवेदय | निवेदय (√नि-वेदय् लोट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | जा | प | ते | र्कृ | शा | श्व | स्य |
| पु | त्रा | न्स | त्य | प | रा | क्र | मान् |
| त | पो | ब | ल | भृ | ता | न्ब्र | ह्म |
| न्रा | घ | वा | य | नि | वे | द | य |