अन्वयः
धीमतः of the sagacious, तस्य मुनेः ascetic Viswamitra, जपतः while muttering in a subdued tone, महार्हाणि venerable, अस्त्राणि astras, सर्वाणि all, राघवम् for Rama, उपतस्थुः (reached) served.
Summary
While the sagacious ascetic Viswamitra was muttering the mystic terms of these venerable astras (addressing their respective deities), all these weapons (with their mystic power) attended on Rama.
पदच्छेदः
| जपतस् | जपत् (√जप् + शतृ, ६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| मुनेस् | मुनि (६.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| विश्वामित्रस्य | विश्वामित्र (६.१) |
| धीमतः | धीमत् (६.१) |
| उपतस्थुर् | उपतस्थुः (√उप-स्था लिट् प्र.पु. बहु.) |
| महार्हाणि | महार्ह (१.३) |
| सर्वाण्य् | सर्व (१.३) |
| अस्त्राणि | अस्त्र (१.३) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ज | प | त | स्तु | मु | ने | स्त | स्य |
| वि | श्वा | मि | त्र | स्य | धी | म | तः |
| उ | प | त | स्थु | र्म | हा | र्हा | णि |
| स | र्वा | ण्य | स्त्रा | णि | रा | घ | वम् |