अथ ते राममामन्त्र्य कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् ।
एवमस्त्विति काकुत्स्थमुक्त्वा जग्मुर्यथागतम् ॥
अथ ते राममामन्त्र्य कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् ।
एवमस्त्विति काकुत्स्थमुक्त्वा जग्मुर्यथागतम् ॥
अन्वयः
अथ thereafter, ते those devatas, एवम् अस्तु इति saying "Be it so", काकुत्स्थम् Rama, उक्त्वा having spoken, प्रदक्षिणम् circumambulation, कृत्वा having done, रामम् Rama, आमन्त्य्र having taken leave of him, यथागतम् from whichever place they had come, जग्मु: went.Summary
Thereafter those devatas having said, "Be it so", circumambulated Rama, took leave of him and returned to their respective abodes from where they had come.पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| ते | तद् (१.३) |
| रामम् | राम (२.१) |
| आमन्त्र्य | आमन्त्र्य (√आ-मन्त्रय् + ल्यप्) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| प्रदक्षिणम् | प्रदक्षिण (२.१) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| अस्त्व् | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| काकुत्स्थम् | काकुत्स्थ (२.१) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| जग्मुर् | जग्मुः (√गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| यथागतम् | यथा (अव्ययः)–गत (√गम् + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | ते | रा | म | मा | म | न्त्र्य |
| कृ | त्वा | चा | पि | प्र | द | क्षि | णम् |
| ए | व | म | स्त्वि | ति | का | कु | त्स्थ |
| मु | क्त्वा | ज | ग्मु | र्य | था | ग | तम् |