अन्वयः
ये याचितार: those seekers of favours, इतस्तत: from here and there, एनम् him, अभिवर्तन्ते approach, यच्च whichever, यत्र wherever, यथावच्च in whatever manner, सर्वम् all that, तेभ्य: for them, प्रयच्छति is granting.
M N Dutt
He duly confer upon such as repair to him from various quarters all those things that they ask for. And do yourself.
Summary
'He is granting the seekers whatever, wherever and in whichever maner they, coming from here and there approach him for favour'.
पदच्छेदः
| ये | यद् (१.३) |
| चैनम् | च (अव्ययः)–एनद् (२.१) |
| अभिवर्तन्ते | अभिवर्तन्ते (√अभि-वृत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| याचितार | याचितृ (१.३) |
| इतस् | इतस् (अव्ययः) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| यच् | यद् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| यथावच् | यथावत् (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| तेभ्यः | तद् (४.३) |
| प्रयच्छति | प्रयच्छति (√प्र-यम् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ये | चै | न | म | भि | व | र्त | न्ते |
| या | चि | ता | र | इ | त | स्त | तः |
| य | च्च | य | त्र | य | था | व | च्च |
| स | र्वं | ते | भ्यः | प्र | य | च्छ | ति |