अन्वयः
अथ then, कृतार्थौ having fulfilled their purpose, मुदितौ rejoicing, वीरौ two heroes, रामलक्ष्मणौ Rama and Lakshmana, तां रजनीम् that night, प्रहृष्टेन with delighted, अन्तरात्मना hearts, तत्र there, ऊषतु: lived.
M N Dutt
Those heroes, Rāma and Laksmana, their interest secured, with glad hearts passed that night there.
Summary
There, with their purpose fulfilled the heroes, Rama and Lakshmana, full of joy in their hearts spent the night.
पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| तां | तद् (२.१) |
| रजनीं | रजनी (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| कृतार्थौ | कृतार्थ (१.२) |
| रामलक्ष्मणौ | राम–लक्ष्मण (१.२) |
| ऊषतुर् | ऊषतुः (√वस् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| मुदितौ | मुदित (√मुद् + क्त, १.२) |
| वीरौ | वीर (१.२) |
| प्रहृष्टेनान्तरात्मना | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त, ३.१)–अन्तरात्मन् (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | थ | तां | र | ज | नीं | त | त्र |
| कृ | ता | र्थौ | रा | म | ल | क्ष | णौ |
| ऊ | ष | तु | र्मु | दि | तौ | वी | रौ |
| प्र | हृ | ष्टे | ना | न्त | रा | त्म | ना |