अन्वयः
सुरोत्तम O Best among devatas, त्वम् you, सर्वेषाम् of everyone, भूतानाम् living beings, अन्त: within, चरसि you move, सर्वा: all of us, ते your, प्रभावज्ञा: स्म knowers of your valour, अस्मान् us, किम् अवमन्यसे why are you insulting.
M N Dutt
You range the hearts of all creatures, O foremost of celestials, and we also know your influence. Wherefore, then, do you dishonour us?
Summary
"O best among devatas you move within all living beings, we feel your impact. Why do you insult us?
पदच्छेदः
| अन्तश् | अन्तर् (अव्ययः) |
| चरसि | चरसि (√चर् लट् म.पु. ) |
| भूतानां | भूत (६.३) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| सुरोत्तम | सुर–उत्तम (८.१) |
| प्रभावज्ञाश् | प्रभाव–ज्ञ (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| सर्वाः | सर्व (१.३) |
| किम् | क (२.१) |
| अस्मान् | मद् (२.३) |
| अवमन्यसे | अवमन्यसे (√अव-मन् लट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | न्त | श्च | र | सि | भू | ता | नां |
| स | र्वे | षां | त्वं | सु | रो | त्त | म |
| प्र | भा | व | ज्ञा | श्च | ते | स | र्वाः |
| कि | म | स्मा | न | व | म | न्य | से |