अन्वयः
विश्वामित्रस्तु Visvamitra on his part, प्रहसन्निव (as though) smilingly, काकुत्स्थम् addressing Rama, उवाच spoke, महात्मन: of the magnanimous, सगरस्य Sagara's, विस्तर: in detail, श्रूयताम् may be heard.
Summary
Viswamitra addressing the son of the Kakusthas (Rama) with a smile said, "O Rama hear in detail the story of the magnanimous king Sagara".
पदच्छेदः
| विश्वामित्रस् | विश्वामित्र (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| काकुत्स्थम् | काकुत्स्थ (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| प्रहसन्न् | प्रहसत् (√प्र-हस् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| श्रूयतां | श्रूयताम् (√श्रु प्र.पु. एक.) |
| विस्तरो | विस्तर (१.१) |
| राम | राम (८.१) |
| सगरस्य | सगर (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | श्वा | मि | त्र | स्तु | का | कु | त्स्थ |
| मु | वा | च | प्र | ह | स | न्नि | व |
| श्रू | य | तां | वि | स्त | रो | रा | म |
| स | ग | र | स्य | म | हा | त्म | नः |