ते तं यज्ञहनं ज्ञात्वा क्रोधपर्याकुलेक्षणाः ।
अभ्यधावन्त संक्रुद्धास्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रुवन् ॥
ते तं यज्ञहनं ज्ञात्वा क्रोधपर्याकुलेक्षणाः ।
अभ्यधावन्त संक्रुद्धास्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रुवन् ॥
अन्वयः
ते they, तं हयवरम् that best of horses, ज्ञात्वा knowing, क्रोधपर्याकुलेक्षणा: with eyes reddened with anger, खनित्रलाङ्गलधरा: armed with spades, ploughshares, नानावृक्षशिलाधरा: with every kind of trees, stones, सङ्क्रुद्धा: furious with anger, अभ्यधावन्त rushed towards him, तिष्ठ stay, तिष्ठ stay, इति अब्रुवन् च also said.Summary
They recognised that best of horses. Their eyes were red with anger. Armed with spades, ploughshares and every kind of tree and stone and furious with wrath, they rushed towards Kapila shouting, wait, waitपदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| तं | तद् (२.१) |
| यज्ञहनं | यज्ञहन (२.१) |
| ज्ञात्वा | ज्ञात्वा (√ज्ञा + क्त्वा) |
| क्रोधपर्याकुलेक्षणाः | क्रोध–पर्याकुल–ईक्षण (१.३) |
| अभ्यधावन्त | अभ्यधावन्त (√अभि-धाव् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| संक्रुद्धास् | संक्रुद्ध (√सम्-क्रुध् + क्त, १.३) |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. ) |
| तिष्ठेति | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| चाब्रुवन् | च (अव्ययः)–अब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | तं | य | ज्ञ | ह | नं | ज्ञा | त्वा |
| क्रो | ध | प | र्या | कु | ले | क्ष | णाः |
| अ | भ्य | धा | व | न्त | सं | क्रु | द्धा |
| स्ति | ष्ठ | ति | ष्ठे | ति | चा | ब्रु | वन् |