अन्वयः
धर्मवत्सला: ते सर्वे all those who love dharma, मुनय: sages, प्रीतमनस: pleased, प्रशस्तव्यौ praiseworthy, गायमानौ while both of them were chanting, कुशीलवौ singers (Kusa and Lava), प्रशशंसु: praised.
Summary
All the sages steeped in dharma, pleased with them, praised the admirable Kusa and Lava as they sang.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| प्रीतमनसः | प्रीत (√प्री + क्त)–मनस् (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| मुनयो | मुनि (१.३) |
| धर्मवत्सलाः | धर्म–वत्सल (१.३) |
| प्रशशंसुः | प्रशशंसुः (√प्र-शंस् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| प्रशस्तव्यौ | प्रशस्तव्य (√प्र-शंस् + कृत्, २.२) |
| गायमानौ | गायमान (√गा + शानच्, २.२) |
| कुशीलवौ | कुशीलव (२.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | प्री | त | म | न | सः | स | र्वे |
| मु | न | यो | ध | र्म | व | त्स | लाः |
| प्र | श | शं | सुः | प्र | श | स्त | व्यौ |
| गा | य | मा | नौ | कु | शी | ल | वौ |