अन्वयः
परन्तप: tormentor of enemies, स: प्रभु: that Rama, सचिवै: by ministers, भ्रातृभिश्च by brothers, उपोपविष्ट: surrounded by, दिव्ये in a splendid, काञ्चने golden, सिंहासने throne, आसीन: was seated.
Summary
Rama, the tormentor of enemies, surrounded by his ministers and brothers occupied the splendid golden throne.
पदच्छेदः
| आसीनः | आसीन (√आस् + क्त, १.१) |
| काञ्चने | काञ्चन (७.१) |
| दिव्ये | दिव्य (७.१) |
| स | तद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सिंहासने | सिंहासन (७.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
| उपोपविष्टैः | उपोपविष्ट (√उपोप-विश् + क्त, ३.३) |
| सचिवैर् | सचिव (३.३) |
| भ्रातृभिश् | भ्रातृ (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| परंतपः | परंतप (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | सी | नः | का | ञ्च | ने | दि | व्ये |
| स | च | सिं | हा | स | ने | प्र | भुः |
| उ | पो | प | वि | ष्टैः | स | चि | वै |
| र्भ्रा | तृ | भि | श्च | प | रं | त | पः |