अथ धन्वन्तरिर्नाम अप्सराश्च सुवर्चसः ।
अप्सु निर्मथनादेव रसात्तस्माद्वरस्त्रियः ।
उत्पेतुर्मनुजश्रेष्ठ तस्मादप्सरसोऽभवन् ॥
अथ धन्वन्तरिर्नाम अप्सराश्च सुवर्चसः ।
अप्सु निर्मथनादेव रसात्तस्माद्वरस्त्रियः ।
उत्पेतुर्मनुजश्रेष्ठ तस्मादप्सरसोऽभवन् ॥
अन्वयः
मनुजश्रेष्ठ O Best among men, अप्सु waters, निर्मथनात् churning, तस्मात् रसात् from that essence, वरस्त्रिय: excellent women, उत्पेतु: emerged, तस्मात् for that reason, अप्सरस: apsaras, अभवन् became.M N Dutt
After a thousand years, had rolled on, arose a male being impregnated with the Āyurveda, of exceedingly righteous soul, called Dhanvantari, bearing in his hands a stick, and a Kamandalu. And there arose also, from the cream of the churning waters, those magnificent dames the shining Apsaras. And, O foremost of men, as they had emerged from water, they are called Apsaras.Summary
O Best among men excellent women emerged out of the essence produced by churning of waters. Therefore they are known as apsarasas.पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| धन्वन्तरिर् | धन्वन्तरि (१.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| अप्सराश् | अप्सरस् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुवर्चसः | सुवर्चस् (१.३) |
| अप्सु | अप् (७.३) |
| निर्मथनाद् | निर्मथन (५.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| रसात् | रस (५.१) |
| तस्माद् | तद् (५.१) |
| वरस्त्रियः | वर–स्त्री (१.३) |
| उत्पेतुर् | उत्पेतुः (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मनुजश्रेष्ठ | मनुज–श्रेष्ठ (८.१) |
| तस्माद् | तद् (५.१) |
| अप्सरसो | अप्सरस् (१.३) |
| ऽभवन् | अभवन् (√भू लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | ध | न्व | न्त | रि | र्ना | म | अ | प्स | रा | श्च |
| सु | व | र्च | सः | अ | प्सु | नि | र्म | थ | ना | दे | व |
| र | सा | त्त | स्मा | द्व | र | स्त्रि | यः | उ | त्पे | तु | र्म |
| नु | ज | श्रे | ष्ठ | त | स्मा | द | प्स | र | सो | ऽभ | वन् |