पदच्छेदः
| पद्मपत्त्रविशालाक्षौ | पद्म–पत्त्र–विशाल–अक्ष (१.२)–पद्म–पत्त्र–विशाल–अक्ष (१.२) |
| खड्गतूणीधनुर्धरौ | खड्ग–तूणी–धनुस्–धर (१.२)–खड्ग–तूणी–धनुस्–धर (१.२) |
| अश्विनाव् | अश्विन् (१.२)–अश्विन् (१.२) |
| इव | इव (अव्ययः)–इव (अव्ययः) |
| रूपेण | रूप (३.१)–रूप (३.१) |
| समुपस्थितयौवनौ | समुपस्थित (√समुप-स्था + क्त)–यौवन (१.२)–समुपस्थित (√समुप-स्था + क्त)–यौवन (१.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | द्म | प | त्र | वि | शा | ला | क्षौ |
| ख | ड्ग | तू | णी | ध | नु | र्ध | रौ |
| अ | श्वि | ना | वि | व | रू | पे | ण |
| स | मु | प | स्थि | त | यौ | व | नौ |