पदच्छेदः
| यदृच्छयैव | यदृच्छा (३.१)–एव (अव्ययः)–यदृच्छा (३.१)–एव (अव्ययः) |
| गां | गो (२.१)–गो (२.१) |
| प्राप्तौ | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.२)–प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.२) |
| देवलोकाद् | देव–लोक (५.१)–देव–लोक (५.१) |
| इवामरौ | इव (अव्ययः)–अमर (१.२)–इव (अव्ययः)–अमर (१.२) |
| कथं | कथम् (अव्ययः)–कथम् (अव्ययः) |
| पद्भ्याम् | पद् (३.२)–पद् (३.२) |
| इह | इह (अव्ययः)–इह (अव्ययः) |
| प्राप्तौ | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.२)–प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.२) |
| किमर्थं | किमर्थम् (अव्ययः)–क (२.१)–अर्थ (२.१) |
| कस्य | क (६.१)–क (६.१) |
| वा | वा (अव्ययः)–वा (अव्ययः) |
| मुने | मुनि (८.१)–मुनि (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दृ | च्छ | यै | व | गां | प्रा | प्तौ |
| दे | व | लो | का | दि | वा | म | रौ |
| क | थं | प | द्भ्या | मि | ह | प्रा | प्तौ |
| कि | म | र्थं | क | स्य | वा | मु | ने |