अन्वयः
स: Visvamitra, सोपाध्यायपुरोधस: together with spiritual teachers, priests, तान् मुनीन् sages, यथान्यायम् in accordance with tradition, पृष्ट्वा having enquired, तत: afterwards, प्रहृष्टवत् like an immesely delighted person, सर्वै: all, समागच्छत् joined them.
Summary
Viswamitra duly enquired the wellbeing of the sages and the spiritual teachers, priests in right order. And thereafter the rest joined them in great delight.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तांश् | तद् (२.३) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| मुनीन् | मुनि (२.३) |
| पृष्ट्वा | पृष्ट्वा (√प्रच्छ् + क्त्वा) |
| सोपाध्यायपुरोधसः | स (अव्ययः)–उपाध्याय–पुरोधस् (२.३) |
| यथान्यायं | यथान्यायम् (अव्ययः) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सर्वैः | सर्व (३.३) |
| समागच्छत् | समागच्छत् (√समा-गम् लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रहृष्टवान् | प्रहृष्टवत् (√प्र-हृष् + क्तवतु, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | तां | श्चा | पि | मु | नी | न्पृ | ष्ट्वा |
| सो | पा | ध्या | य | पु | रो | ध | सः |
| य | था | न्या | यं | त | तः | स | र्वैः |
| स | मा | ग | च्छ | त्प्र | हृ | ष्ट | वान् |