अन्वयः
वसिष्ठेन by Vasishta, प्रत्याख्यात: refused, दक्षिणाम् दिशम् towards southern direction, ययौ went, तत: afterwards, नृप: king, तत्कर्मसिद्ध्यर्थम् to fulfill his purpose, तस्य his(Vasishta's), पुत्रान् sons, गत: went.
Summary
Refused by Vasishta, the king went south in order to fulfil his purpose and approached Vasishta's sons.
पदच्छेदः
| प्रत्याख्यातो | प्रत्याख्यात (√प्रत्या-ख्या + क्त, १.१) |
| वसिष्ठेन | वसिष्ठ (३.१) |
| स | तद् (१.१) |
| ययौ | ययौ (√या लिट् प्र.पु. एक.) |
| दक्षिणां | दक्षिण (२.१) |
| दिशम् | दिश् (२.१) |
| वसिष्ठा | वसिष्ठ (१.३) |
| दीर्घतपसस् | दीर्घतपस् (१.३) |
| तपो | तपस् (२.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| तेपिरे | तेपिरे (√तप् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | त्या | ख्या | तो | व | सि | ष्ठे | न |
| स | य | यौ | द | क्षि | णां | दि | शम् |
| व | सि | ष्ठा | दी | र्घ | त | प | स |
| स्त | पो | य | त्र | हि | ते | पि | रे |