अन्वयः
महायज्ञम् great sacrifice, यष्टुकाम: desire to perform, तत् for that reason, अनुज्ञातुम् to give consent, अर्हथ fit and proper, अहम् I, गुरुपुत्रान् sons of spiritual guide, सर्वान् all of you, नमस्कृत्य having paid my homage, प्रसादये I will please you.
Summary
'I wish to perform a great sacrifice. You are worthy enough to tender your consent. I pay homage to all the sons of my spiritual guide oblige.
पदच्छेदः
| यष्टुकामो | यष्टु–काम (१.१) |
| महायज्ञं | महत्–यज्ञ (२.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| अनुज्ञातुम् | अनुज्ञातुम् (√अनु-ज्ञा + तुमुन्) |
| अर्हथ | अर्हथ (√अर्ह् लट् म.पु. द्वि.) |
| गुरुपुत्रान् | गुरु–पुत्र (२.३) |
| अहं | मद् (१.१) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| नमस्कृत्य | नमस्कृत्य (√नमस्-कृ + ल्यप्) |
| प्रसादये | प्रसादये (√प्र-सादय् लट् उ.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | ष्टु | का | मो | म | हा | य | ज्ञं |
| त | द | नु | ज्ञा | तु | म | र्थ | थ |
| गु | रु | पु | त्रा | न | हं | स | र्वा |
| न्न | म | स्कृ | त्य | प्र | सा | द | ये |