अन्वयः
दैवमेव destiny alone, परम् is allpowerful, मन्ये I am thinking, पौरुषम् तु the effort of a man, निरर्थकम् is invain, सर्वम् everything, दैवेन by destiny, आक्रम्यते is occupied, दैवम् destiny, परमा supreme, गति: हि way indeed.
Summary
I consider destiny to be allpowerful. The effort of a man goes in vain. Everything is controlled by destiny. It is the supreme resort.
पदच्छेदः
| दैवम् | दैव (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| परं | पर (२.१) |
| मन्ये | मन्ये (√मन् लट् उ.पु. ) |
| पौरुषं | पौरुष (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| निरर्थकम् | निरर्थक (१.१) |
| दैवेनाक्रम्यते | दैव (३.१)–आक्रम्यते (√आ-क्रम् प्र.पु. एक.) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| दैवं | दैव (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| परमा | परम (१.१) |
| गतिः | गति (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दै | व | मे | व | प | रं | म | न्ये |
| पौ | रु | षं | तु | नि | र | र्थ | कम् |
| दै | वे | ना | क्र | म्य | ते | स | र्वं |
| दै | वं | हि | प | र | मा | ग | तिः |