अन्वयः
ते शिष्या: those disciples, सर्वे all, समागम्य having returned, ज्वलिततेजसम् shining with splendour, मुनिम् sage visvamitra, सर्वेषाम् of all, ब्रह्मवादिनाम् of the expounders of veda, वचनम् words, ऊचुश्च told.
Summary
All the disciples on their return, communicated to the sage shining in splendour what the expounders of the vedas had said.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| शिष्याः | शिष्य (१.३) |
| समागम्य | समागम्य (√समा-गम् + ल्यप्) |
| मुनिं | मुनि (२.१) |
| ज्वलिततेजसम् | ज्वलित (√ज्वल् + क्त)–तेजस् (२.१) |
| ऊचुश् | ऊचुः (√वच् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| ब्रह्मवादिनाम् | ब्रह्मन्–वादिन् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | च | शि | ष्याः | स | मा | ग | म्य |
| मु | निं | ज्व | लि | त | ते | ज | सम् |
| ऊ | चु | श्च | व | च | नं | स | र्वे |
| स | र्वे | षां | ब्र | ह्म | वा | दि | नाम् |