अन्वयः
यस्य for whom, क्षत्रिय: kshatriya, याजक: priest of the sacrifice, विशेषत: particularly, चण्डालस्य of a chandala, तस्य for him, सदसि in the sacrifice, सुरर्षय: devatas and sages, हवि: offerings, कथम् how, भोक्तार: will partake.
Summary
When a kshatriya acts as a priest for the sacrifice, particularly for a chandala, how can gods and sages partake the offerings?
पदच्छेदः
| क्षत्रियो | क्षत्रिय (१.१) |
| याजको | याजक (१.१) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| चण्डालस्य | चण्डाल (६.१) |
| विशेषतः | विशेषतः (अव्ययः) |
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| सदसि | सदस् (७.१) |
| भोक्तारो | भोक्तृ (१.३) |
| हविस् | हविस् (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| सुरर्षयः | सुर–ऋषि (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क्ष | त्रि | यो | या | ज | को | य | स्य |
| च | ण्डा | ल | स्य | वि | शे | ष | तः |
| क | थं | स | द | सि | भो | क्ता | रो |
| ह | वि | स्त | स्य | सु | र | र्ष | यः |