अन्वयः
मुनिपुङ्गव O Preeminent among ascetics, सर्वम् all, तत् शतम् वासिष्ठम् that hundred sons of Vasishta, क्रोधपर्याकुलाक्षरम् speech confused with anger, यत् which, वचनम् word, आह have spoken, सर्वम् all that, त्वम् you, शृणु listen.
Summary
O Preeminent among ascetics Here is what the hundred sons of Vasishta spoke in anger.
पदच्छेदः
| वासिष्ठं | वासिष्ठ (२.१) |
| तच् | तद् (२.१) |
| छतं | शत (२.१) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| क्रोधपर्याकुलाक्षरम् | क्रोध–पर्याकुल–अक्षर (२.१) |
| यद् | यद् (२.१) |
| आह | आह (√अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| शृणु | शृणु (√श्रु लोट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| मुनिपुंगव | मुनि–पुंगव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वा | सि | ष्ठं | त | च्छ | तं | स | र्वं |
| क्रो | ध | प | र्या | कु | ला | क्ष | रम् |
| य | दा | ह | व | च | नं | स | र्वं |
| शृ | णु | त्वं | मु | नि | पुं | ग | व |