अन्वयः
अहम् I, पुण्यकर्मण: men of pious deeds, यज्ञसाह्यकरान् to assist in the sacrifice, सर्वान् all, महर्षीन् maharshis, आमन्त्रये I shall invite, निर्वृत: with relief, यक्ष्यसि you will perform the sacrifice.
Summary
O king I shall invite pious maharshis to assist you in the sacrifice which you will be able to perform with great relief.
पदच्छेदः
| अहम् | मद् (१.१) |
| आमन्त्रये | आमन्त्रये (√आ-मन्त्रय् लट् उ.पु. ) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| महर्षीन् | महत्–ऋषि (२.३) |
| पुण्यकर्मणः | पुण्य–कर्मन् (२.३) |
| यज्ञसाह्यकरान् | यज्ञ–साह्य–कर (२.३) |
| राजंस् | राजन् (८.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| यक्ष्यसि | यक्ष्यसि (√यज् लृट् म.पु. ) |
| निर्वृतः | निर्वृत (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ह | मा | म | न्त्र | ये | स | र्वा |
| न्म | ह | र्षी | न्पु | ण्य | क | र्म | णः |
| य | ज्ञ | सा | ह्य | क | रा | न्रा | जं |
| स्त | तो | य | क्ष्य | सि | नि | र्वृ | तः |