अन्वयः
गुरुशापकृतम् as a result of the curse of spiritual preceptor, यत् which, रूपम् form, त्वयि in you, वर्तते existing, अनेन by this, रूपेण सह with form, सशरीर: with the physical body, गमिष्यसि you shall go.
Summary
With the present physical body disfigured by the curse of your spiritual preceptor, you shall go to heaven.
पदच्छेदः
| गुरुशापकृतं | गुरु–शाप–कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| रूपं | रूप (१.१) |
| यद् | यद् (१.१) |
| इदं | इदम् (१.१) |
| त्वयि | त्वद् (७.१) |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
| अनेन | इदम् (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| रूपेण | रूप (३.१) |
| सशरीरो | स (अव्ययः)–शरीर (१.१) |
| गमिष्यसि | गमिष्यसि (√गम् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| गु | रु | शा | प | कृ | तं | रू | पं |
| य | दि | दं | त्व | यि | व | र्त | ते |
| अ | ने | न | स | ह | रू | पे | ण |
| स | श | री | रो | ग | मि | ष्य | सि |