अन्वयः
महेन्द्रेण by Indra, एवम् thus, उक्त: spoken, त्रिशङ्कु: Trishanku, त्राहि protect me, इति so, तपोधनम् one having asceticism as wealth, विश्वामित्रम् Viswamitra, विक्रोशमान: wailing, पुन: again, अपतत् fell down.
Summary
Thus spoken to by Indra, Trisanku crying, "O Viswamitra, Protect me, Protect me" started falling down.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तो | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| महेन्द्रेण | महत्–इन्द्र (३.१) |
| त्रिशङ्कुर् | त्रिशङ्कु (१.१) |
| अपतत् | अपतत् (√पत् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| विक्रोशमानस् | विक्रोशमान (√वि-क्रुश् + शानच्, १.१) |
| त्राहीति | त्राहि (√त्रा लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| विश्वामित्रं | विश्वामित्र (२.१) |
| तपोधनम् | तपस्–धन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्तो | म | हे | न्द्रे | ण |
| त्रि | श | ङ्कु | र | प | त | त्पु | नः |
| वि | क्रो | श | मा | न | स्त्रा | ही | ति |
| वि | श्वा | मि | त्रं | त | पो | ध | नम् |