अयमिक्ष्वाकुदायादस्त्रिशङ्कुरिति विश्रुतः ।
धर्मिष्ठश्च वदान्यश्च मां चैव शरणं गतः ।
स्वेनानेन शरीरेण देवलोकजिगीषया ॥
अयमिक्ष्वाकुदायादस्त्रिशङ्कुरिति विश्रुतः ।
धर्मिष्ठश्च वदान्यश्च मां चैव शरणं गतः ।
स्वेनानेन शरीरेण देवलोकजिगीषया ॥
अन्वयः
इक्ष्वाकुदायाद: born in the Ikshavaku race, त्रिशङ्कुरिति as Trishanku by name, विश्रुत: wellknown, धर्मिष्ठ: virtuous, वदान्यश्च munificient, अयम् this person, तेन such, अनेन शरीरेण with this physical body, देवलोकजिगीषया with the intention of conquering deva loka, माम् me, शरणं गत: sought refuge.Summary
"This religious and generous king born in the Ikshvaku race, wellknown as Trisanku sought my refuge to gain heaven with his physical body,पदच्छेदः
| अयम् | इदम् (१.१) |
| इक्ष्वाकुदायादस् | इक्ष्वाकु–दायाद (१.१) |
| त्रिशङ्कुर् | त्रिशङ्कु (१.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| विश्रुतः | विश्रुत (√वि-श्रु + क्त, १.१) |
| धर्मिष्ठश् | धर्मिष्ठ (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वदान्यश् | वदान्य (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मां | मद् (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| शरणं | शरण (२.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| स्वेनानेन | स्व (३.१)–इदम् (३.१) |
| शरीरेण | शरीर (३.१) |
| देवलोकजिगीषया | देव–लोक–जिगीषा (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | य | मि | क्ष्वा | कु | दा | या | द | स्त्रि | श | ङ्कु | रि |
| ति | वि | श्रु | तः | ध | र्मि | ष्ठ | श्च | व | दा | न्य | श्च |
| मां | चै | व | श | र | णं | ग | तः | स्वे | ना | ने | न |
| श | री | रे | ण | दे | व | लो | क | जि | गी | ष | या |