अन्वयः
तत: thereafter, परमसम्भ्रान्ता: extremely wonderstruck, सर्षिसङ्घा: hosts of rishis, सुरासुरा: with suras and asuras, महात्मानम् magnanimous, विश्वामित्रम् Viswamitra, सानुनयम् in apropitiatory tone, वच: this word, ऊचु: said.
Summary
Struck with wonder and fear, hosts of rishis, suras and asuras humbly addressed Viswamitra.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| परमसंभ्रान्ताः | परम–संभ्रान्त (√सम्-भ्रम् + क्त, १.३) |
| सर्षिसंघाः | स (अव्ययः)–ऋषि–संघ (१.३) |
| सुरर्षभाः | सुर–ऋषभ (१.३) |
| विश्वामित्रं | विश्वामित्र (२.१) |
| महात्मानम् | महात्मन् (२.१) |
| ऊचुः | ऊचुः (√वच् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| सानुनयं | स (अव्ययः)–अनुनय (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | प | र | म | सं | भ्रा | न्ताः |
| स | र्षि | सं | घाः | सु | र | र्ष | भाः |
| वि | श्वा | मि | त्रं | म | हा | त्मा | न |
| मू | चुः | सा | नु | न | यं | व | चः |