अन्वयः
मुनिपुत्रक: O Son of the sage, अम्बरीषस्य Ambarisha's, अस्मिन् यज्ञे in this sacrifice, इमे द्वे these two, दिव्ये sacred, गाथे verses, गायेथा: chant, तत: there after, सिद्धिम् success, अवाप्स्यसि you will achieve.
Summary
O Son of sage chant thse two sacred mantras in the sacrifice of Ambarisha.There after you will achieve success (long life)".
पदच्छेदः
| इमे | इदम् (२.२) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| गाथे | गाथा (२.२) |
| द्वे | द्वि (२.२) |
| दिव्ये | दिव्य (२.२) |
| गायेथा | गायेथाः (√गा विधिलिङ् म.पु. ) |
| मुनिपुत्रक | मुनि–पुत्रक (८.१) |
| अम्बरीषस्य | अम्बरीष (६.१) |
| यज्ञे | यज्ञ (७.१) |
| ऽस्मिंस् | इदम् (७.१) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| सिद्धिम् | सिद्धि (२.१) |
| अवाप्स्यसि | अवाप्स्यसि (√अव-आप् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | मे | तु | गा | थे | द्वे | दि | व्ये |
| गा | ये | था | मु | नि | पु | त्र | क |
| अ | म्ब | री | ष | स्य | य | ज्ञे | ऽस्मिं |
| स्त | तः | सि | द्धि | म | वा | प्स्य | सि |