अन्वयः
तृष्णया with thirst, श्रमेण च and fatigue, विवर्णवदन: with discoloured face, दीन: piteous, आशु immediately, मुने: sage's, अङ्के lap, पपात fell, इदम् these, वाक्यम् words, उवाच ह spoke.
Summary
With his face discoloured due to thirst and fatigue, he (Sunassepha) immediately fell into the sage's lap in a pitiable condition and said:
पदच्छेदः
| विषण्णवदनो | विषण्ण (√वि-सद् + क्त)–वदन (१.१) |
| दीनस् | दीन (१.१) |
| तृष्णया | तृष्णा (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| श्रमेण | श्रम (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पपाताङ्के | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.)–अङ्क (७.१) |
| मुने | मुनि (६.१) |
| राम | राम (८.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| चेदम् | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | ष | ण्ण | व | द | नो | दी | न |
| स्तृ | ष्ण | या | च | श्र | मे | ण | च |
| प | पा | ता | ङ्के | मु | ने | रा | म |
| वा | क्यं | चे | द | मु | वा | च | ह |