त्राता त्वं हि मुनिश्रेष्ठ सर्वेषां त्वं हि भावनः ।
राजा च कृतकार्यः स्यादहं दीर्घायुरव्ययः ॥
त्राता त्वं हि मुनिश्रेष्ठ सर्वेषां त्वं हि भावनः ।
राजा च कृतकार्यः स्यादहं दीर्घायुरव्ययः ॥
अन्वयः
मुनिश्रेष्ठ O Best among ascetics, त्वम् you, सर्वेषाम् to everybody, त्राता हि protector, त्वम् you, भावन: हि promoter of others' welfare, राजा king, कृतकार्य: fulfilling the purpose, स्यात् become, अहम् I, दीर्घायु: one who has long life, अव्यय: imperishable, अनुत्तमम् great, तप: austerities, तप्त्वा having performed, स्वर्गलोकम् heaven, उपाश्नीयाम् I may enjoy.Summary
O Best among ascetics you are the protecor of everybody. You are promoter of others' welfare. May the king fulfil his purpose. May I live long and become immortal and attain heaven after performing great penance. May I enjoy heaven.पदच्छेदः
| त्राता | त्रातृ (१.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मुनिश्रेष्ठ | मुनि–श्रेष्ठ (८.१) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| भावनः | भावन (१.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कृतकार्यः | कृत (√कृ + क्त)–कार्य (१.१) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| अहं | मद् (१.१) |
| दीर्घायुर् | दीर्घ–आयुस् (१.१) |
| अव्ययः | अव्यय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्रा | ता | त्वं | हि | मु | नि | श्रे | ष्ठ |
| स | र्वे | षां | त्वं | हि | भा | व | नः |
| रा | जा | च | कृ | त | का | र्यः | स्या |
| द | हं | दी | र्घा | यु | र | व्य | यः |