अन्वयः
राघुनन्दन O Rama, मुने: for the ascetic, सामर्षा filled with indignation, बुद्धि: a thought, समुत्पन्ना arose, एतत् सर्वम् all this, महत् great, तपोपहरणम् taking away tapas, सुराणाम् devatas', कर्म deed.
Summary
O Delight of the Raghus (Rama) a sense of indignation filled the mind of the ascetic. 'All this is the conspiracy of the gods to deprive me of my great austerities', he thought.
पदच्छेदः
| बुद्धिर् | बुद्धि (१.१) |
| मुनेः | मुनि (६.१) |
| समुत्पन्ना | समुत्पन्न (√समुत्-पद् + क्त, १.१) |
| सामर्षा | स (अव्ययः)–अमर्ष (१.१) |
| रघुनन्दन | रघुनन्दन (८.१) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| सुराणां | सुर (६.३) |
| कर्मैतत् | कर्मन् (१.१)–एतद् (१.१) |
| तपोऽपहरणं | तपस्–अपहरण (१.१) |
| महत् | महत् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| बु | द्धि | र्मु | नेः | स | मु | त्प | न्ना |
| सा | म | र्षा | र | घु | न | न्द | न |
| स | र्वं | सु | रा | णां | क | र्मै | त |
| त्त | पो | ऽप | ह | र | णं | म | हत् |