अन्वयः
सर्षिगणा: along with hosts of rishis, सर्वे all, सुरा: devatas, समागम्य having met together, अयम् कुशिकात्मज: this Viswamitra, साधु rightly, महर्षिशब्दम् title of Maharshi, लभताम् be obtained, आमन्त्रयन् thought over.
Summary
After consultations the gods and sages decided that this son of Kushika (Viswamitra) deserved the status of a Maharshi".
पदच्छेदः
| अमन्त्रयन् | अमन्त्रयन् (√मन्त्रय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| समागम्य | समागम्य (√समा-गम् + ल्यप्) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| सर्षिगणाः | स (अव्ययः)–ऋषि–गण (१.३) |
| सुराः | सुर (१.३) |
| महर्षिशब्दं | महत्–ऋषि–शब्द (२.१) |
| लभतां | लभताम् (√लभ् लोट् प्र.पु. एक.) |
| साध्व् | साधु (१.१) |
| अयं | इदम् (१.१) |
| कुशिकात्मजः | कुशिक–आत्मज (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | म | न्त्र | य | न्स | मा | ग | म्य |
| स | र्वे | स | र्षि | ग | णाः | सु | राः |
| म | ह | र्षि | श | ब्दं | ल | भ | तां |
| सा | ध्व | यं | कु | शि | का | त्म | जः |