अन्वयः
सर्वलोकपितामह: grandsire of all the worlds, देवतानाम् devatas, वच: words, श्रुत्वा having heard, मधुरै: with sweet, वाक्यै: words, त्रिदशान् devatas, सान्त्वयन् consoling, इदम् these words, अब्रवीत् spoke.
Summary
Hearing the words of the devatas, Brahma, the Grandsire of all the worlds consoled the devatas with sweet words, saying:
पदच्छेदः
| वासवस्य | वासव (६.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| सर्वलोकपितामहः | सर्व–लोक–पितामह (१.१) |
| अब्रवीन् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| मधुरं | मधुर (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| हर्षेण | हर्ष (३.१) |
| महताप्लुतः | महत् (३.१)–आप्लुत (√आ-प्लु + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दे | व | ता | नां | व | चः | श्रु | त्वा |
| स | र्व | लो | क | पि | ता | म | हः |
| अ | ब्र | वी | न्म | धु | रं | वा | क्यं |
| वि | श्वा | मि | त्रं | त | पो | ध | नम् |