अन्वयः
सुमहातेजा: exceedingly effulgent, ब्रह्मा Brahma, सुरुचिरम् attractive, वच: words, अब्रवीत् spoke, त्वम् you, स्वार्जितै: with selfearned, शुभै: कर्मभि: sacred deeds, ऋषि: असि have become Rishi, ते भद्रम् prosperity to you.
Summary
Exceedingly effulgent Brahma spoke to him, "You have become a rishi through the selfearned sacred deeds. Fare you well".
पदच्छेदः
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| सुमहातेजा | सु (अव्ययः)–महत्–तेजस् (१.१) |
| ब्रह्मा | ब्रह्मन् (१.१) |
| सुरुचिरं | सु (अव्ययः)–रुचिर (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| ऋषिस् | ऋषि (१.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| असि | असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| स्वार्जितैः | स्व–अर्जित (√अर्जय् + क्त, ३.३) |
| कर्मभिः | कर्मन् (३.३) |
| शुभैः | शुभ (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ब्र | वी | त्सु | म | हा | ते | जा |
| ब्र | ह्मा | सु | रु | चि | रं | व | चः |
| ऋ | षि | स्त्व | म | सि | भ | द्रं | ते |
| स्वा | र्जि | तैः | क | र्म | भिः | शु | भैः |