अन्वयः
देवेश: lord of devatas, तम् him, एवम् thus, उक्त्वा having spoken, पुन: again, त्रिदिवम् towards heaven, अभ्यगात् went, महातेजा: a man of mighty effulgence, विश्वामित्र: Visvamitra, भूय: again, महत् great, तप: austerities, तेपे performed.
Summary
Brahma, the lord of the gods, having said this returned to heaven. The brilliant Viswamitra continues his austerities.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| देवेशस् | देवेश (१.१) |
| त्रिदिवं | त्रिदिव (२.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| अभ्यगात् | अभ्यगात् (√अभि-गा प्र.पु. एक.) |
| विश्वामित्रो | विश्वामित्र (१.१) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| भूयस् | भूयस् (अव्ययः) |
| तेपे | तेपे (√तप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महत् | महत् (२.१) |
| तपः | तपस् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मे | व | मु | क्त्वा | दे | वे | श |
| स्त्रि | दि | वं | पु | न | र | भ्य | गात् |
| वि | श्वा | मि | त्रो | म | हा | ते | जा |
| भू | य | स्ते | पे | म | ह | त्त | पः |