अन्वयः
तत: then, ब्रह्मा Brahma, तम् addressing him, उवाच said, त्त्वम् you, जितेन्द्रियस्तावत् having conquered the senses, न not, मुनिशार्दूल O Best among ascestics, यतस्व strive still, इति thus, उक्त्वा having spoken, त्रिदिवम् towards heaven, गत: went.
Summary
Then Brahma said to him, 'You have not conquered the senses yet. O Tiger among ascetics, strive still.' Having said this he went toward heaven.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ब्रह्मा | ब्रह्मन् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| तावत् | तावत् (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| जितेन्द्रियः | जित (√जि + क्त, १.१)–इन्द्रिय (१.१) |
| यतस्व | यतस्व (√यत् लोट् म.पु. ) |
| मुनिशार्दूल | मुनि–शार्दूल (१.१) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| त्रिदिवं | त्रिदिव (२.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मु | वा | च | त | तो | ब्र | ह्मा |
| न | ता | व | त्त्वं | जि | ते | न्द्रि | यः |
| य | त | स्व | मु | नि | शा | र्दू | ल |
| इ | त्यु | क्त्वा | त्रि | दि | वं | ग | तः |