दृष्ट्वा कन्दर्पवशगो मुनिस्तामिदमब्रवीत् ।
अप्सरः स्वागतं तेऽस्तु वस चेह ममाश्रमे ।
अनुगृह्णीष्व भद्रं ते मदनेन सुमोहितम् ॥
दृष्ट्वा कन्दर्पवशगो मुनिस्तामिदमब्रवीत् ।
अप्सरः स्वागतं तेऽस्तु वस चेह ममाश्रमे ।
अनुगृह्णीष्व भद्रं ते मदनेन सुमोहितम् ॥
अन्वयः
दृष्ट्वा having seen, मुनि: sage Visvamitra, कन्दर्पवशग: under the influence of Kandarpa, Cupid, ताम् her, इदम् these words, अब्रवीत् spoke, अप्सर: O Apsarasa, ते to you, स्वागतम् अस्तु wecome, मम my, इह here, आश्रमे hermitage, वस च dwell, मदनेन by Manmatha, सुमोहितम् highly infatuated, अनुगृह्णीष्व favour me, ते भद्रम् safety to you.Summary
On seeing her (Menaka) Viswamitra came under the influence of the god of love (fell in love with her). He said, O Apsara welcome to my hermitage stay here. I am infatuated with you: Oblige me. Wish you well.पदच्छेदः
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| कन्दर्पवशगो | कन्दर्प–वशग (१.१) |
| मुनिस् | मुनि (१.१) |
| ताम् | तद् (२.१) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| अप्सरः | अप्सरस् (८.१) |
| स्वागतं | स्वागत (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| वस | वस (√वस् लोट् म.पु. ) |
| चेह | च (अव्ययः)–इह (अव्ययः) |
| ममाश्रमे | मद् (६.१)–आश्रम (७.१) |
| अनुगृह्णीष्व | अनुगृह्णीष्व (√अनु-ग्रह् लोट् म.पु. ) |
| भद्रं | भद्र (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| मदनेन | मदन (३.१) |
| सुमोहितम् | सु (अव्ययः)–मोहित (√मोहय् + क्त, २.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ष्ट्वा | क | न्द | र्प | व | श | गो | मु | नि | स्ता | मि |
| द | म | ब्र | वीत् | अ | प्स | रः | स्वा | ग | तं | ते | ऽस्तु |
| व | स | चे | ह | म | मा | श्र | मे | अ | नु | गृ | ह्णी |
| ष्व | भ | द्रं | ते | म | द | ने | न | सु | मो | हि | तम् |